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Tuesday, November 1, 2011

वो शाम कुछ ऐसी होगी!



बहुत
 शोर-शराबे में कटा है
 जिंदगी का ये सफ़र
 उस मोड़ पर 
 छाई ख़ामोशी होगी
 वो शाम कुछ ऐसी होगी!


Sunday, October 30, 2011

पल भर




पल भर

आँख बंद कर देख ना सका खुद को

कितने टुकड़े कर दिए मेरे

आईने को तोड़ कर

खुद को छूने की

एक ख्वाहिश ने मेरी...




Tuesday, October 25, 2011

जख्म


कभी रिसने लगते हैं
कभी सूख जाते हैं
नियत खराब है मेरे ज़ख्मों की 
ना हरे ही हैं ना भरे ही हैं! 


Tuesday, October 11, 2011

वो अक्सर मेरे घर आता है...

  

 वो अक्सर मेरे घर आता है
मेरे सिरहाने कभी सामने बैठ जाता है
ताकता रहता है मुझे
फिर एक लम्बी सांस भरके लौट जाता है;
कभी सुबकता  है  मेरे कंधे पे हाथ रख के
कभी हंस कर मेरे बालों को बिखेर जाता है
वो ख्वाब अक्सर मेरे घर आता है!!!!!


Thursday, September 8, 2011

वो शहर...




मैं ही बस गमज़ब्त नहीं, वो भी सिसक रहा होगा कहीं
उस शहर की सडकों पर दिन-रात खून सा बहा करता था मैं!




वो शहर जो मेरी सांसो में था
खून सा दोड़ता था शरीर में
मेरी पहचान मेरी आन-बान था
वो शहर जिससे परे दुनिया ना थी
वो शहर पराया हो गया
बिछुड़ गया
बिखर गया!




ना टपकता है आँखों से
ना सिमटता  है आहों में
एक बूँद भर याद है, ज़िन्दगी भर के ख्वाब की!



Tuesday, September 6, 2011

रंग...

अच्छा है रात का कोई रंग नहीं है 
हर कोई बेरंग है एक सा है इसमें


ये उजालों के ढोंग, रंगों के चोंचलें
अच्छा है कुछ पल थमता है इसमें !


Monday, August 29, 2011

तेरी याद...


कितने दिन बीत गए
और कितनी राते बे-नैन हुई
ना मै भुला हूँ तुम्हे
ना तेरी याद भुला पाई है मुझे!


Thursday, August 25, 2011

Are you alright?


·         'Are u alright', my mirror threw it on me. Before, my tongue swung into action...my eyes revealed it all; and i cud see through blurred eyes, someone in the mirror was crying!
 
 
 

वक़्त!


काश मै वक़्त को रोक पाता
हाथ पकड़ इसका ना छोड़ पाता
पास बैठा कर इसको समझाता
ठहरने में है जो मज़ा उड़ने में नहीं आता! 


रात भर...








मेरी खिड़की पे बैठा रहता है जो रात भर
सपना है मेरा
न खुद सोता है
और न सोने देता है मुझे!

Wednesday, August 24, 2011

तू कहाँ नहीं है...



तू नहीं है तो भी तू कहाँ नहीं है
बंद नज़र जहाँ तू वही वही है
मैं  कैद हूँ तुझमे या खुद से आजाद हो गया हूँ
ज़िन्दगी से खो गया हूँ या फिर से जिंदा हो गया हूँ!




Tuesday, August 23, 2011

बूँद सा!!

बूँद सा किसी की भीगी जुल्फों में उलझ जाऊं
भीगा मैं किसी की भीगी आँखों में भीग जाऊं  
होंठ सा किसी के होठों से बूँद- बूँद उठाऊँ   
आज फिर तमन्ना जवान है
और दिल भरा- भरा सा है  
आज फिर बारिश है बाहर   
और दिल हरा- हरा सा है! 

Tuesday, August 9, 2011

जिंदगी...

जिंदगी की कलम कुछ ऐसे फिसली
हर रास्ता हो गया चोराहा
हर रास्ता वीरान हो गया
हर मजिल अनजान हो गयी
हर वक़्त चलने की कसक थी
सफ़र तो तय हो गया
मगर दूरियाँ कुछ ऐसी बिखरी
हर फैसला फासला दे गया!